अजय कुमार,लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मॉनसून सत्र सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान हंगामे की चपेट में आ गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष, माता प्रसाद पांडेय ने गोरखपुर के विरासत गलियारे से जुड़े एक मामले का जिक्र किया और आरोप लगाया कि वहां उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर के पांडेयहाता में उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भद्दे नारे लगाए और उन्हें रोकने की कोशिश की। पांडेय ने यह भी बताया कि उनके साथ जा रही दो गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद उन्होंने धरने पर बैठने का निर्णय लिया, लेकिन पुलिस की सलाह पर वहां से चुपचाप चले गए। बाद में जब वे जटाशंकर चौराहे पहुंचे तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थक, जो कि मुख्य रूप से भाजपा कार्यकर्ता नहीं थे, उनके वाहन के सामने आ गए और उसे खींचने की कोशिश की। हालांकि, जब स्थिति तनावपूर्ण हो गई, तो पुलिस ने उन लोगों को हटा लिया। पांडेय ने आरोप लगाया कि उनके साथ वहां अभद्रता की गई और इस पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर लोकतंत्र में ऐसे हालात बने तो यह उसकी हत्या के बराबर होगा।
इन आरोपों पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने पांडेय को आईना दिखाते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पांडेय के कंधे पर बंदूक रखकर निशाना साधा जा रहा है। योगी ने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने गोरखपुर के व्यापारियों से मुलाकात की थी और वहां विकास के कार्यों की चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का पांडेयहाता सबसे पुराना बाजार है, जहां कंजेशन और अवैध कब्जों को खत्म कर सड़क बनाई जा रही है। योगी ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सैकड़ों बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से हुई थी और विकास को लेकर किसी ने कोई पहल नहीं की। सीएम ने यह भी कहा कि उनके दौरे के तीन दिन पहले उन्होंने व्यापारियों से मुआवजे की बात की थी, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता वहां बिना बुलाए पहुंचने से व्यापारियों के मन में शंका थी। व्यापारियों ने पांडेय के दौरे का विरोध किया क्योंकि वे समझते थे कि इससे उनके विकास कार्यों में विघ्न आ सकता है। योगी ने यह भी कहा कि व्यापारियों के मन में समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान व्याप्त भय और गुंडा टैक्स की वजह से समाजवादी पार्टी के प्रति आक्रोश था, और यही कारण था कि व्यापारियों ने उनका विरोध किया।
